माँ तुम मेरी ज़िन्दगी हो

दोस्तों हमारे ज़िन्दगी में हमारी माँ से ज्यादा भला और कहाँ किसी का योगदान होता है पर जब हम उसके नजदीक रहते है तो हमें उसकी कद्र ही नहीं होती पर दूर होकर उसकी महानता का बोध होता है |

मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ उसके बाद जो कविता मैंने लिखी है वो मेरी भावनाओं का ही कलम पर उतर आना था |

ये कविता मेरी माँ के लिए ..............

Comments

  1. वाह! बहुत ही भावुक रचना। माँ को समर्पित और माँ के बेहद नजदीक भी।
    बहुत बढ़िया।
    आपकी लेखनी वाकई बहुत बढ़िया है....आसान भाषा में लिखते हैं आप। खूब लिखिए...।
    लेकिन बहुत अफसोस हुआ ये देखकर कि आपके ब्लॉग पर आपकी मात्र दो रचनाएँ है। पता नहीं आप लिखना छोड़ दिए या फिर ब्लॉग पर साझा नहीं करते हैं?
    जो भी कारण हो...लेकिन आप लिखिए...खूब लिखिए।

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